Nisha Bhagat Suicide Case: आदिवासी समाज की फायरब्रैंड नेत्री निशा भगत ने आत्महत्या कर ली है। उन्होंने अपने फेसबुक पर लाइव आकर पंखे से फंदा लगाकर अपनी जान ले ली है। मीडिया सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि उनके पार्थिव शरीर को पोस्टमॉर्टम के लिये रांची के रिम्स अस्पताल ले जाया गया है। बताया जा रहा है कि अस्पताल में उन्हें बचाने की बहुत कोशिश की गयी, लेकिन उन्होंने दम तोड़ दिया.
फेसबुक लाइव के दौरान की आत्महत्या
निशा भगत का एक फेसबुक लाइव वीडियो खूब वायरल हो रहा है। घटना से ठीक पहले वह इस लाइव वीडियो में वह रोती-बिलखती नज़र आ रही हैं। वह कमरे में एक कुर्सी पर स्वेटर और लेगिंग्स पहने बैठी दिखायी देती हैं। फेसबुक लाइव के दौरान वह बार बार ज़मीन दलालों और पुलिस प्रशासन का ज़िक्र करती दिखायी देती हैं। उन्होंने वर्तमान सरकार और आदिवासी नेता अजय तिर्की पर भी कई गंभीर आरोप लगाये।
बार बार आता रहा पिता का फोन
फेसबुक लाइव के दौरान कई बार निशा भगत के पिता ने उन्हें फोन किया। निशा भगत खुद कहती भी हैं कि 'पापा का बार बार फोन आ रहा है।' इस दौरान वह रोते हुए अपनी पीड़ा जाहिर कर रही थीं। निशा ने अपने पिता का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें इस घटना से गहरा दुख होगा. उन्होंने कहा कि कई अधिकारियों और थाना प्रभारी से भी संपर्क किया था, लेकिन कोई मदद नहीं मिली. उन्होंने कहा कि अब वह अपनी जीवन लीला समाप्त करने जा रही है. अपने वीडियो में उन्होंने बार-बार कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है और बात सुनने वाला कोई नहीं था.
इस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि "मुझपर बीजेपी-आरएसएस के दलाल होने का आरोप लगता है। मैं बीजेपी-आरएसएस की दलाल नहीं हूं।"
मौत से पहले पुलिस को किया फोन
मिली जानकारी के मुताबिक, निशा भगत मानसिक तनाव में थीं। फेसबुक लाइव के दौरान उन्होंने कई लोगों पर आरोप लगाने के साथ प्रशासन और अपनी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने पुलिस पदाधिकारियों और थानेदारों को फोन करने की कोशिश भी की। लाइव के दौरान निशा भगत ने पिठोरिया थाना प्रभारी को फोन कर कहा था कि वह अपनी जीवन लीला समाप्त करने जा रही हैं।
मौत से पहले निशा भगत का पोस्ट
इससे कुछ घंटे पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी साझा की थी। इसमें उन्होंने लिखा था, 'मेरी मौत का जिम्मेदार झारखंड पुलिस।' पोस्ट में उन्होंने मिशनरी, पैसे और जमीन को लेकर भी अपनी बात रखी थी।
बाबूलाल मरांडी ने की गिरफ्तारी की मांग
इस घटना पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी शोक व्यक्त किया है. उन्होंने अपने एक्स पोस्ट के माध्यम से लिखा, "जनजातीय समाज के हक-अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली और समाज की मुखर आवाज रही युवा नेत्री निशा भगत के आत्महत्या की जानकारी मिली है। उन्होंने इसके लिये मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पिठोरिया थाना प्रभारी और अजय तिर्की को ज़िम्मेवार ठहराया है।"
बाबूलाल मरांडी का पोस्ट
उन्होंने आगे लिखा, मुख्यमंत्री के इशारे पर कुछ दलालों द्वारा आदिवासियों की ज़मीन हड़पने का प्रयास किया जा रहा है। राज्य के हर थाना और अंचल में ज़मीन लूट का खेल चल रहा है। आदिवासी समाज आखिर अपनी ही ज़मीन पर कब तक प्रताड़ित होता रहेगा? इससे अधिक शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण कुछ नहीं हो सकता कि आदिवासियों के हक-अधिकारों की आवाज़ उठाने वाली एक युवा महिला को इस हद तक प्रताड़ित होना पड़े कि वह अपनी जान दे दे।"
बाबूलाल मरांडी ने सीेएम हेमंत सोरेन से इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने लिखा, "मुख्यमंत्री हेमंत सोेरेन तत्काल अपने पद से इस्तीफा दें। निशा भगत ने जिन लोगों को अपनी आत्महत्या के लिये ज़िम्मेवार बताया है, उनकी शीघ्र गिरफ्तारी हो तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाये।"
कौन हैं निशा भगत?
निशा कुमारी भगत झारखंड के गुमला जिले की रहने वाली हैं।वह स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई के बाद दुर्गापुर से होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई और बेंगलुरु में नौकरी भी कर चुकी हैं। वर्तमान में वह आदिवासी समाज के अधिकारों को लेकर सक्रिय थीं। उनकी मुख्य पहचान आदिवासी अस्मिता, संस्कृति, सभ्यता और सरना धर्म/झंडे की रक्षा के लिए लड़ने वाली नेत्री के रूप में थी।वह प्रकृति पूजक आदिवासी समाज की रूढ़िवादी व्यवस्था में सुधार और समाज को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए जानी जाती थीं। वह विभिन्न सामाजिक मुद्दों, जैसे जमीन अधिग्रहण के मामलों और आदिवासी समाज से जुड़े विषयों पर मुखर होकर अपनी बात रखती रही हैं।