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JSSC-CGL पेपर लीक मामले में फरार आरोपी मिथिलेश सिंह के दो रिश्तेदार गिरफ्तार, एक सफल अभ्यर्थी भी शामिल
JSSC CGL परीक्षा में कथित पेपर लीक और धांधली के मामले में CID को बड़ी सफलता मिली है। जांच एजेंसी ने प्रश्नपत्र छापने वाली प्रिंटिंग एजेंसी ICN के संचालक मिथिलेश सिंह के दो रिश्तेदारों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भानु प्रताप और सुमित कुमार सिंह के रूप में हुई है। इनमें भानु प्रताप खुद JSSC CGL परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी हासिल कर चुका था। वह उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी (ASO) के पद पर कार्यरत था। वहीं, सुमित कुमार सिंह रांची के हटिया इलाके में किराना और फोटोकॉपी की दुकान चलाता था। CID की जांच में दोनों पर मिलकर 12 अभ्यर्थियों को अनुचित तरीके से परीक्षा पास कराने में मदद करने का आरोप लगा है। दोनों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
नौकरी हासिल करने के बाद दूसरे अभ्यर्थियों की भी कराता था सेटिंग?
CID की जांच में भानु प्रताप की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, भानु प्रताप खुद भी कथित तौर पर इसी नेटवर्क की मदद से JSSC CGL परीक्षा में सफल हुआ था। इसके बाद वह दूसरे अभ्यर्थियों को भी परीक्षा में सफल कराने के कथित नेटवर्क से जुड़ गया।
जांच में सुमित कुमार सिंह की भूमिका भी सामने आई है। दोनों के बीच कथित सांठगांठ और दूसरे अभ्यर्थियों को अनुचित तरीके से पास कराने के आरोपों की जांच की जा रही है।
ICN प्रिंटिंग एजेंसी से कैसे जुड़ा है पूरा मामला?
JSSC CGL परीक्षा में कथित पेपर लीक की जांच का एक प्रमुख पहलू प्रश्नपत्र की छपाई और परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी से जुड़ा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, परीक्षा संचालन का काम वेबेल टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। इसके बाद प्रश्नपत्रों की छपाई और आपूर्ति से जुड़ा काम ICN एजेंसी को सौंपे जाने की बात सामने आई।
CID का आरोप है कि प्रश्नपत्र छापने के दौरान ही उसे लीक कर दिया गया था। इसके बाद कथित नेटवर्क के जरिए प्रश्नपत्र और उत्तर अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए। जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि प्रश्नपत्र लीक करने, अभ्यर्थियों तक पहुंचाने और उन्हें परीक्षा में सफल कराने में किसकी क्या भूमिका थी।
मिथिलेश सिंह अब भी फरार, नेटवर्क के दूसरे सदस्यों की तलाश
इस मामले में ICN के संचालक मिथिलेश सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में है। वह अब तक CID की गिरफ्त से बाहर है। उसके दो रिश्तेदारों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी को नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है।
CID दोनों आरोपियों से पूछताछ के जरिए कथित नेटवर्क, अभ्यर्थियों से संपर्क और दूसरे लोगों की भूमिका से संबंधित साक्ष्य जुटाने की कोशिश करेगी। जांच एजेंसी का अगला लक्ष्य इस मामले में शामिल अन्य संदिग्धों तक पहुंचना है।
अंतिम चरण में जांच, पूरक चार्जशीट की तैयारी
JSSC CGL पेपर लीक मामले में CID की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जांच एजेंसी मामले में पूरक आरोपपत्र यानी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है। इसके जरिए जांच में सामने आए नए तथ्यों और आरोपियों की कथित भूमिका को अदालत के सामने रखा जा सकता है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रश्नपत्र लीक होने से लेकर अभ्यर्थियों को कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाने तक का नेटवर्क किस तरह काम कर रहा था। भानु प्रताप और सुमित कुमार सिंह की गिरफ्तारी से जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। अब सभी की नजर CID की अगली कार्रवाई और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों पर है।