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बदरीनाथ हेलीकॉप्टर क्रैश : पायलट समेत सभी 6 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत, खराब मौसम के बावजूद जारी थीं उड़ानें
उत्तराखंड के चमोली जिले में बदरीनाथ धाम से देहरादून लौट रहा एक हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया। हादसा जोशीमठ के नजदीक पांडुकेश्वर क्षेत्र में भेड़ गदेरे की पहाड़ी पर हुआ। इस दर्दनाक दुर्घटना में हेलीकॉप्टर में सवार सभी 6 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में हेलीकॉप्टर का पायलट और 5 यात्री शामिल हैं। चमोली पुलिस और आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने हादसे में 6 लोगों की मौत की पुष्टि की है।
हादसे की सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल सक्रिय हो गए। सेना ने भी मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान संभाल ली। दुर्घटनास्थल दुर्गम पहाड़ी इलाके में होने और मौसम खराब रहने के कारण तलाशी एवं बचाव अभियान में मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
जोशीमठ के पास पहाड़ी पर दुर्घटनाग्रस्त हुआ हेलीकॉप्टर
जानकारी के मुताबिक, हेलीकॉप्टर बदरीनाथ धाम से श्रद्धालुओं को लेकर देहरादून लौट रहा था। इसे देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड पर उतरना था। इसी दौरान जोशीमठ के पास पांडुकेश्वर क्षेत्र में हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर सामने आई।
हादसे में शामिल हेलीकॉप्टर ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का बताया गया है। हेलीकॉप्टर में एक पायलट और पांच यात्री सवार थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, सभी यात्री कर्नाटक के रहने वाले थे।
दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और अन्य बचाव दल मौके पर पहुंचे। सेना की टीम ने भी अभियान में हिस्सा लिया। पहाड़ी क्षेत्र में हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण घटनास्थल तक पहुंचना और वहां से जरूरी जानकारी जुटाना चुनौतीपूर्ण रहा।
हादसे में पायलट समेत 6 लोगों की मौत
आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर में सवार सभी 6 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 48 वर्षीय पायलट कैप्टन हिमांशु सभरवाल शामिल हैं, जो दिल्ली के निवासी बताए गए हैं।
हेलीकॉप्टर में सवार पांच यात्रियों में प्रतापा, अरुण सालुंके, वीबी. शंकर गौड़ा, सुधीर के. और एसएस नटराजा के नाम सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सभी यात्री कर्नाटक के निवासी थे।
इस हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा और खराब मौसम में उड़ानों के संचालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सेना और बचाव दलों ने संभाला मोर्चा
हेलीकॉप्टर दुर्घटना की जानकारी मिलते ही राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया। एसडीआरएफ की टीमों के साथ सेना के जवान भी मौके पर पहुंचे। दुर्घटनास्थल की भौगोलिक स्थिति और पहाड़ी इलाके में खराब मौसम के कारण अभियान में कठिनाइयां आईं।
तलाशी अभियान के दौरान दो अन्य हेलीकॉप्टरों को भी लगाया गया था। हालांकि, मौसम खराब होने के कारण दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर की सटीक लोकेशन का पता लगाने में परेशानी हुई। बाद में चमोली पुलिस ने हेलीकॉप्टर में सवार सभी छह लोगों की मौत की पुष्टि की।
खराब मौसम के बीच भी जारी थीं हेलीकॉप्टरों की उड़ानें
इस हादसे के बाद बदरीनाथ और देहरादून के बीच संचालित हो रही हेलीकॉप्टर सेवाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को खराब मौसम के बावजूद बदरीनाथ के लिए हेलीकॉप्टरों की उड़ानें जारी थीं।
दोपहर 1 बजकर 5 मिनट पर एक हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरी और वह सुरक्षित देहरादून पहुंच गया। इसके सात मिनट बाद, यानी 1 बजकर 12 मिनट पर एक अन्य हेलीकॉप्टर ने देहरादून के लिए उड़ान भरी। यही हेलीकॉप्टर बाद में लापता हो गया और इसके दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर सामने आई।
इसके बाद दोपहर 1 बजकर 20 मिनट पर बदरीनाथ से एक और हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरी, जो सुरक्षित देहरादून पहुंच गया।
लापता हेलीकॉप्टर की तलाश के दौरान भी हुईं अन्य उड़ानें
रिपोर्ट के मुताबिक, दोपहर 1 बजकर 12 मिनट पर उड़ान भरने वाला हेलीकॉप्टर लापता होने की जानकारी सामने आने के बाद भी दिन में अन्य हेलीकॉप्टरों की उड़ानें जारी रहीं। दोपहर 2 बजकर 10 मिनट, 2 बजकर 15 मिनट और 2 बजकर 22 मिनट पर भी उड़ानें भरी गईं।
बताया गया कि उस दिन देहरादून के लिए करीब 12 हेलीकॉप्टरों ने उड़ान भरी थी और ये सभी चार्टर उड़ानें थीं।
हालांकि, इन उड़ानों के संबंध में मौसम की आधिकारिक स्थिति, उड़ान संचालन से जुड़े निर्णयों और संबंधित सुरक्षा प्रोटोकॉल की पूरी जानकारी सामने आना जरूरी है। केवल खराब मौसम के बीच उड़ान होने से दुर्घटना का कारण निर्धारित नहीं किया जा सकता। इसके लिए तकनीकी जांच और आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार करना होगा।
ट्रांस भारत एविएशन के हेलीकॉप्टरों की उड़ान पर रोक
हादसे के बाद एहतियाती कदम उठाते हुए मैसर्स ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के सभी हेलीकॉप्टरों की उड़ानों पर रोक लगा दी गई है। इस फैसले का उद्देश्य कंपनी के हेलीकॉप्टरों के संचालन और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की समीक्षा करना है।
अब इस बात पर भी ध्यान दिया जा रहा है कि दुर्घटना के समय मौसम की स्थिति कैसी थी, हेलीकॉप्टर के संचालन में किन सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया गया था और हादसे की वजह क्या रही।