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JPSC परीक्षा घोटाला: TDPL ने सरकारी उपक्रम ITI लिमिटेड के नाम पर हासिल किया परीक्षाओं का ज़िम्मा, 2024 से ही चल रहा था फर्जीवाड़ा

JPSC परीक्षा घोटाला
JPSC परीक्षा घोटाला
जेपीएससी परीक्षाओं का संचालन करने वाली टीडीपीएल एजेंसी एक दूसरी कंपनी के आंचल तले काम कर रही थी. इस कंपनी का नाम था ITI Ltd. यानी टीडीपीएल को सीधे तौर पर परीक्षाओं की ज़िम्मेदारी नहीं दी जाती थी. ज़िम्मा असल में ITI Ltd. को मिलता था, लेकिन ये हैंडओवर कर दिया जाता था टीडीपीएल को. ठीक उसी तरह जैसा आपने फिल्म 3 इडियट्स में देखा होगा. फिल्म में रणछोड़दास चांचड़ यानी रैंचो इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लेता हैं. पढ़ाई करता हैं, परीक्षाएं देता हैं, अपनी काबिलियत के दम पर टॉप करता है और इंजीनियरिंग की डिग्री भी हासिल करता  हैं. 

लेकिन फिल्म के आखिर में हमें पता चलता है कि जिसे अब तक हम रैंचो समझ रहे थे, वो तो असल में फुंसुक वांगड़ू है. उसने एक बड़े बाप के औलाद रंछोड़दास के लिये अपनी पहचान छिपाकर इंजीनियरिंग की डिग्री ली और एक समझौते के तहत ये डिग्री उसके हवाले कर दी. यानी डिग्री फुंसुक वांगड़ू ने ली, लेकिन डिग्री पर नाम चढ़ा रंछोड़दास छांछड़ का. कुछ ऐसा ही फिल्मी खुलासा जेपीएससी परीक्षा घोटाला मामले में टीडीपीएल एजेंसी को लेकर भी हुआ है. 

सीआईडी की चार्जशीट में बड़े खुलासे

सीआईडी ने अपनी चार्जशीट में जेपीएससी परीक्षाओं का संचालन करने वाली एजेंसी टीडीपीएल को लेकर कई अहम खुलासे किये हैं. दाखिल चार्जशीट में सिर्फ परीक्षा संचालन में गड़बड़ी की बात नहीं कही गई है, बल्कि यह भी बताया गया है कि टीडीपीएल को किस तरह काम मिला, कैसे दूसरी कंपनियों को प्रतियोगिता में शामिल दिखाया गया और किस तरह एक सरकारी उपक्रम ITI Ltd. के नाम का इस्तेमाल कर टीडीपीएल पर्दे के पीछे से काम करती रही. 

CID की चार्जशीट में बड़े खुलासे
CID की चार्जशीट में बड़े खुलासे

सीआईडी की चार्जशीट के मुताबिक, टीडीपीएल का यह खेल सिर्फ जून 2025 में काम मिलने के बाद शुरू नहीं हुआ था. बल्कि कंपनी साल 2024 से ही ITI लिमिटेड की आड़ में जेपीएससी की परीक्षाओं से जुड़ा काम कर रही थी. यानी जिस कंपनी को जेपीएससी ने आधिकारिक तौर पर काम सौंपा था, वह कंपनी खुद परीक्षा संचालन का काम नहीं कर रही थी बल्कि ITI Ltd.को मिले काम को टीडीपीएल के हवाले कर दिया गया था. 

साल 2024 से ITI Ltd. की आड़ में काम कर रही थी TDPL

इस पूरे मामले की शुरुआत को समझना भी जरूरी है. सीआईडी की जांच में सामने आया कि सबसे पहले क्रिरीट नाम की एक कंपनी बनाई गई थी. इस कंपनी से जुड़े लोग टीडीपीएल के कहने पर जेपीएससी की तत्कालीन अध्यक्ष नीलिमा केरकेट्टा से काम के सिलसिले में मिले थे. लेकिन उस समय जेपीएससी की ओर से यह बात सामने आई कि किसी निजी कंपनी के बजाय सरकारी उपक्रम यानी PSU-  ITI Ltd. से परीक्षा संचालन का काम लिया जाएगा.

इसके बाद कहानी में  ITI Ltd. की एंट्री होती है. सीआईडी के मुताबिक, टीडीपीएल से जुड़े लोग ITI Ltd. के दस्तावेज लेकर नंदलाल नाम के एक स्थानीय व्यक्ति के माध्यम से जेपीएससी के चेयरमैन से मिले. मकसद था ITI Ltd. के नाम पर काम हासिल करना. आखिरकार ITI Ltd. के नाम पर काम मिलने के बाद इसे टीडीपीएल को सबलेट कर दिया गया. यानी कागजों पर काम ITI Ltd. के पास था, लेकिन जमीन पर काम करने की जिम्मेदारी टीडीपीएल निभा रही थी.

इस काम के लिए टीडीपीएल की ओर से कृष्णा नाम के व्यक्ति को जेपीएससी में अधिकृत किया गया था. और इस तरह टीडीपीएल साल 2024 से ही ITI Ltd. के नाम का इस्तेमाल कर जेपीएससी की परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी हुई थी. यही नहीं, जब ITI Ltd. इस काम से हट गई, तब भी टीडीपीएल की भूमिका खत्म नहीं हुई. जेपीएससी की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू और फाइनल रिजल्ट तैयार करने का काम भी टीडीपीएल ने ही किया.

TDPL को काम देने में नियमों का पालन हुआ या नहीं?


अब सवाल यह है कि आखिर टीडीपीएल को काम देने की प्रक्रिया में नियमों का पालन किया गया था या नहीं? इस सवाल पर भी सीआईडी की चार्जशीट में गंभीर बातें कही गई हैं. चार्जशीट के मुताबिक, झारखंड सरकार के वित्त विभाग ने साल 2024 में अधिसूचना जारी कर राज्य में ‘झारखंड प्रोक्योरमेंट ऑफ गुड्स एंड सर्विसेज मैनुअल’ लागू किया था. जून 2025 में जब टीडीपीएल को जेपीएससी की परीक्षा से जुड़ा काम दिया गया, तब भी यही नियम लागू थे. इस मैनुअल के अनुसार, 10 लाख रुपये से अधिक के किसी भी काम को देने के लिए खुली निविदा यानी ओपन टेंडर की प्रक्रिया अपनाना जरूरी था. 
बिना टेंडर ही TDPL को दे दी गयी परीक्षाओं की ज़िम्मेदारी
बिना टेंडर ही TDPL को दे दी गयी परीक्षाओं की ज़िम्मेदारी

इसका सीधा मतलब है कि सरकार या सरकारी संस्थान किसी बड़े प्रोजेक्ट या संवेदनशील परीक्षा के संचालन जैसी ज़िम्मेदारी अपने मनमुताबिक किसी भी कंपनी को नहीं दे सकते. इसके लिए टेंडर निकालना होता है, ताकि योग्य कंपनियां आवेदन कर सकें और सभी को बराबरी का मौका मिले. लेकिन सीआईडी की जांच में पाया गया कि टीडीपीएल को काम देने के लिए इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. न तो नियमों के मुताबिक खुला टेंडर निकाला गया और न ही सभी योग्य कंपनियों को अपनी दावेदारी पेश करने का मौका दिया गया. इसके बजाय सीधे टीडीपीएल को काम सौंप दिया गया.


3 कंपनियों के बीच मुकाबला दिखाने की कोशिश

हालांकि, कागजों पर ऐसा दिखाने की कोशिश ज़रूर की गई कि कंपनी का चयन एक प्रतियोगी प्रक्रिया के तहत हुआ है. इसके लिए दो दूसरी कंपनियों को भी चयन प्रक्रिया में शामिल दिखाया गया. लेकिन सीआईडी की जांच में यह पूरी प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ गई.

चार्जशीट के मुताबिक, टीडीपीएल के अलावा ALPS सॉल्यूशन और नेव असेसमेंट प्राइवेट लिमिटेड नाम की दो कंपनियों को भी इस प्रक्रिया में शामिल दिखाया गया था. पहली नजर में ऐसा लगता है कि जेपीएससी ने तीन कंपनियों के बीच मुकाबला कराया और फिर टीडीपीएल को काम देने का फैसला किया. लेकिन जब सीआईडी ने इन दोनों कंपनियों के बारे में जानकारी जुटाई और उनके निदेशक से पूछताछ की, तो कहानी कुछ और ही निकली.

जांच में पता चला कि ALPS सॉल्यूशन और नेव असेसमेंट प्राइवेट लिमिटेड, दोनों कंपनियों के निदेशक एक ही व्यक्ति-- गौरव भूटानी हैं. सीआईडी ने जब उनसे पूछताछ की, तो उन्होंने अपने बयान में बताया कि उनकी कंपनियों की ओर से जेपीएससी के किसी भी टेंडर में शामिल होने के लिए कोई आवेदन ही नहीं दिया गया था.

बिना आवेदन के चयन प्रक्रिया में शामिल दिखाने का आरोप


अब ज़रा इस बात को समझिए. जिस प्रक्रिया को कागजों पर तीन कंपनियों के बीच मुकाबले के रूप में दिखाया गया, उसमें शामिल दो कंपनियों का कहना है कि उन्होंने तो इसके लिए आवेदन ही नहीं किया था. यानी सीआईडी की जांच के मुताबिक, इन दोनों कंपनियों को बिना उनकी वास्तविक भागीदारी के चयन प्रक्रिया में शामिल दिखाया गया. सीआईडी की रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि इन दोनों कंपनियों को सिर्फ इसलिए कागजों पर शामिल किया गया, ताकि टीडीपीएल के चयन को एक प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया का रूप दिया जा सके. 

यहां सबसे बड़ा सवाल जेपीएससी जैसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली को लेकर खड़ा होता है. आखिर जिस संस्था पर राज्य के हजारों युवाओं के भविष्य की जिम्मेदारी है, वहां परीक्षा कराने वाली एजेंसी के चयन में इतनी गंभीर अनियमितताएं कैसे हुईं? 

जल्द दाखिल होगी दूसरी चार्जशीट


जेपीएससी परीक्षा घोटाला  मामले में अब तक 34 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल खियांग्ते, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह समेत 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गयी है. अब मामले में अन्य 22 गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र (Supplementary Chargesheet) फाइल करने की तैयारी है. अगले दो दिनों के अंदर इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाये जा सकते हैं. 
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