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झारखंड के सरकारी स्कूलों में बायोमेट्रिक मशीनों से बनेगी शिक्षकों की हाजिरी, 15 करोड़ रुपये होंगे खर्च

सरकारी स्कूलोें में शिक्षकों की बायोमेट्रिक हाजिरी
सरकारी स्कूलोें में शिक्षकों की बायोमेट्रिक हाजिरी

झारखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य के 32 हजार 582 सरकारी स्कूलों में नई आधार प्रमाणित बायोमेट्रिक मशीनें लगाई जाएंगी। अब शिक्षकों और कर्मचारियों को पुराने रजिस्टर या सामान्य फिंगरप्रिंट मशीन के बजाय आधार आधारित बायोमेट्रिक डिवाइस से अपनी हाजिरी बनानी होगी। इस पूरी योजना पर 15 करोड़ 60 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। शिक्षा विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से फर्जी हाजिरी पर रोक लगेगी और स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

32,582 सरकारी स्कूलों में लगेंगी नई मशीनें

राज्य के सरकारी स्कूलों में उपस्थिति व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने नई बायोमेट्रिक मशीनें लगाने की तैयारी की है। इसके तहत राज्य के सभी 32 हजार 582 सरकारी स्कूलों में आधार प्रमाणित बायोमेट्रिक डिवाइस उपलब्ध कराए जाएंगे।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों की हाजिरी डिजिटल तरीके से दर्ज होगी। इसके माध्यम से यह पता लगाना आसान होगा कि शिक्षक समय पर स्कूल पहुंच रहे हैं या नहीं। साथ ही, स्कूलों में कर्मचारियों की उपस्थिति का रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप में रखा जा सकेगा।

मशीनों की खरीद और रखरखाव पर खर्च होंगे 15.60 करोड़

इस योजना के लिए कुल 15 करोड़ 60 लाख रुपये खर्च करने का प्रावधान किया गया है। एक बायोमेट्रिक मशीन की कीमत 2,900 रुपये निर्धारित की गई है। इसके अलावा मशीन की कीमत पर 18 प्रतिशत जीएसटी भी देना होगा।

चालू वित्त वर्ष 2026-27 में इस योजना पर लगभग 11 करोड़ 14 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रत्येक मशीन के साथ एक साल की वारंटी दी जाएगी। वारंटी समाप्त होने के बाद अगले चार वर्षों तक मशीनों के रखरखाव के लिए प्रति मशीन 290 रुपये खर्च किए जाएंगे।

मशीनों की खरीद सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। इससे खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और निर्धारित मानकों के अनुसार डिवाइस उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

पुरानी मशीनों में मिली थीं कई तकनीकी खामियां

दरअसल, झारखंड के सरकारी स्कूलों में वर्ष 2017 में फिंगरप्रिंट स्कैनर मशीनें लगाई गई थीं। लेकिन समय के साथ इन मशीनों में कई तरह की तकनीकी समस्याएं सामने आने लगीं। कई जगह मशीनों के ठीक से काम नहीं करने की शिकायतें मिली थीं।

इसके अलावा फर्जी फिंगरप्रिंट के जरिए हाजिरी बनाने की शिकायतें भी सामने आई थीं। इससे शिक्षकों की वास्तविक उपस्थिति की निगरानी करना मुश्किल हो रहा था। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए शिक्षा विभाग ने पुरानी व्यवस्था में बदलाव करने और आधार प्रमाणित बायोमेट्रिक मशीनें लगाने का फैसला लिया है।

आधार से प्रमाणित होगी बायोमेट्रिक मशीनेें

नई बायोमेट्रिक मशीनें आधार प्रमाणित एल-1 रजिस्टर्ड होंगी। इनमें ऑप्टिकल सेंसर और यूएसबी कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। ये डिवाइस विंडोज और एंड्रॉयड जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ काम करने में सक्षम होंगी।

आधार आधारित प्रमाणीकरण के कारण किसी दूसरे व्यक्ति के फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल कर हाजिरी बनाने की संभावना कम होगी। इससे शिक्षकों की उपस्थिति का अधिक विश्वसनीय रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा।

2030-31 तक लागू रहेगी योजना

शिक्षा विभाग की यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से लेकर 2030-31 तक लागू रहेगी। इसके तहत मशीनों की खरीद के साथ उनके रखरखाव की व्यवस्था भी की गई है। नई बायोमेट्रिक प्रणाली से सरकारी स्कूलों में अनुशासन बेहतर बनाने, शिक्षकों की जवाबदेही बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था की निगरानी को मजबूत करने की उम्मीद है।

हालांकि, नई मशीनें कब से सभी स्कूलों में काम करना शुरू करेंगी, इसे लेकर विस्तृत कार्यान्वयन कार्यक्रम का इंतजार रहेगा।

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