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सीएम हेमंत सोरेन की बड़ी पहल, झारखंड के स्कूलों में मातृभाषा व क्षेत्रीय भाषाओं में होगी पढ़ाई

झारखंड में मातृभाषा में पढ़ाई
झारखंड में मातृभाषा में पढ़ाई

झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अब उनकी मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं के जरिए शिक्षा देने की तैयारी की जा रही है। यानी जिस क्षेत्र में बच्चे कुड़ुख, मुंडारी, खोरठा या दूसरी स्थानीय भाषाएं बोलते हैं, वहां शुरुआती कक्षाओं में उन्हें उनकी अपनी भाषा में पढ़ाया जा सकेगा। राज्य सरकार इसके लिए एक नई भाषा शिक्षा नीति तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस संबंध में अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए हैं।

साल 2020 में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में भी शुरुआती कक्षाओं में मातृभाषा और स्थानीय भाषा के माध्यम से पढ़ाई कराने पर जोर दिया गया है। इसी व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए झारखंड सरकार राज्य की भाषाई विविधता के अनुसार शिक्षा नीति तैयार करना चाहती है।

मातृभाषा में पढ़ाई पर जोर

दरअसल, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड राज्य भाषा शिक्षा नीति के प्रारूप को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा कि बच्चों को शुरुआती कक्षाओं में उनकी मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा मिलनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को बहुभाषिकता के सिद्धांत पर आधारित नीति तैयार करने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री का मानना है कि झारखंड में अलग-अलग क्षेत्रों के बच्चों की अपनी भाषाएं हैं। वे घर, परिवार और आसपास के सामाजिक परिवेश में इन्हीं भाषाओं का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन जब वे स्कूल पहुंचते हैं, तो पढ़ाई मुख्य रूप से हिंदी या अंग्रेजी में होती है। ऐसे में कई बच्चों को पढ़ाई समझने और अपनी बात रखने में परेशानी हो सकती है।

सरकार चाहती है कि भाषा का यह अंतर बच्चों की शिक्षा में बाधा न बने। बच्चे जिस भाषा को पहले से समझते हैं, उसी के माध्यम से उन्हें शुरुआती शिक्षा दी जाए, ताकि वे विषयों को आसानी से समझ सकें और पढ़ाई में उनकी भागीदारी बढ़े।

मातृभाषा के साथ हिंदी और अंग्रेजी भी

नई भाषा शिक्षा नीति में केवल मातृभाषा पर ही जोर नहीं दिया जाएगा, बल्कि हिंदी और अंग्रेजी को भी बराबर महत्व देने की तैयारी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मातृभाषा को हटाए बिना दूसरी और तीसरी भाषा सीखने की व्यवस्था बनाई जाए।

इसका उद्देश्य बच्चों को अपनी स्थानीय भाषा से जोड़े रखना और साथ ही दूसरी भाषाओं में भी सक्षम बनाना है। मुख्यमंत्री चाहते हैं कि 12वीं कक्षा तक पहुंचते-पहुंचते विद्यार्थी अंग्रेजी को अच्छी तरह बोलने, समझने और उसका इस्तेमाल करने में सक्षम हों।

यानी सरकार ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करना चाहती है, जिसमें मातृभाषा, हिंदी और अंग्रेजी एक-दूसरे की सहयोगी बनें। इससे बच्चों को अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़े रहने के साथ आगे की पढ़ाई और रोजगार के अवसरों के लिए भी तैयार किया जा सकेगा।

पढ़ाई के साथ कौशल और खेल पर भी ध्यान

मुख्यमंत्री ने शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखने की बात कही है। उन्होंने निर्देश दिया कि नई शिक्षा व्यवस्था में कौशल आधारित शिक्षा को भी शामिल किया जाए। इसका मकसद बच्चों की रुचि, क्षमता और प्रतिभा को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना है।

इसी कड़ी में मुख्यमंत्री ने हॉकी जैसे खेलों को भी शिक्षा से जोड़ने पर जोर दिया। झारखंड में हॉकी की मजबूत पहचान और प्रतिभाओं को देखते हुए इसे बच्चों के विकास का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जा सकता है। 

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