तेजस्वी, निशांत, बिजेंद्र यादव समेत ये नेता बिहार MLC चुनाव में क्यों नहीं डाल पायेंगे वोट? बड़ी वजह आयी सामने
बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर हो रहे चुनाव के लिए आज शुक्रवार 23 अक्टूबर को मतदान जारी है. 8 में से 4 सीटें स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की हैं। इस चुनाव में कई बड़े और चर्चित नेता वोट नहीं डाल पा रहे हैं, जिनमें उपमुख्यमंत्री से लेकर विपक्ष के नेता तक शामिल हैं।
वोट डालने के लिए क्या हैं कड़े नियम?
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में मतदान करने के लिए केवल स्नातक की डिग्री होना ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए कुछ खास नियमों को पूरा करना जरूरी होता है। नियम के मुताबिक, मतदाता की डिग्री हासिल किए कम से कम तीन साल पूरे होने चाहिए और सबसे मुख्य बात यह है कि उस व्यक्ति का नाम संबंधित स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज होना अनिवार्य है। सूची में नाम न होने पर उच्च शिक्षा प्राप्त लोग भी वोट नहीं डाल सकते हैं।
सम्राट कैबिनेट के मंत्रियों की स्थिति
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में कई ऐसे मंत्री हैं जिनके पास ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन, एलएलबी, एमबीए और पीएचडी जैसी उच्च डिग्रियां हैं, लेकिन सूची में नाम न होने के कारण वे मतदान नहीं कर पाएंगे। भाजपा कोटे से लखेंद्र कुमार रौशन, केदार गुप्ता, मिथिलेश तिवारी, रामचंद्र प्रसाद, नीतीश मिश्रा और अरुण शंकर प्रसाद मतदाता सूची में नाम होने के कारण वोट डाल सकेंगे। वहीं विजय सिन्हा, दिलीप जायसवाल, रामकृपाल यादव और श्रेयसी सिंह के पास डिग्री होने के बावजूद मतदाता सूची में नाम नहीं होने से वे वोट नहीं डाल पाएंगे। संजय टाइगर और प्रमोद कुमार के क्षेत्र में इस बार चुनाव नहीं हो रहा है।
जदयू और अन्य दलों के मंत्रियों का हाल
जदयू कोटे से विजय कुमार चौधरी, अशोक चौधरी और मदन सहनी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता होने के कारण अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। वहीं बिजेंद्र यादव, श्रवण कुमार, लेसी सिंह, रत्नेश सदा और जमा खान 12वीं पास हैं, जिससे वे शैक्षणिक पात्रता पूरी नहीं करते। दामोदर रावत, शीला कुमारी और सुनील कुमार के पास एमए की डिग्री है, लेकिन मतदाता सूची में नाम नहीं होने से वे वोट से वंचित हैं। लोजपा (रामविलास) के संजय कुमार सिंह तिरहुत सीट के मतदाता हैं और वोट डालेंगे, जबकि हम पार्टी के संतोष कुमार सुमन के क्षेत्र में चुनाव नहीं है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव भी ग्रेजुएशन न होने के कारण वोटर बनने के पात्र नहीं हैं।