जनगणना नियमों में बड़ा बदलाव: अब प्राइवेट शिक्षकों और बैंक कर्मियों की भी लगेगी ड्यूटी
देश में साल 2027 में होने वाली आगामी जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने कर्मचारियों की उपलब्धता और उनके दायरे को काफी हद तक बढ़ा दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय की ओर से जनगणना नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए नई अधिसूचना जारी कर दी गई है।इस नए बदलाव के बाद अब देश भर में जनगणना जैसे राष्ट्रीय और व्यापक कार्य के लिए मानव संसाधन की कोई कमी नहीं आएगी, क्योंकि अब सरकारी के साथ-साथ निजी क्षेत्र के संस्थानों से भी कर्मचारियों की सेवाएं ली जा सकेंगी।
जनगणना नियम 1990 में किया गया संशोधन
अब तक के पुराने नियमों के अनुसार जनगणना के काम में मुख्य रूप से सरकारी स्कूलों के शिक्षकों, स्थानीय निकायों के कर्मचारियों तथा केंद्र व राज्य सरकार के चुनिंदा क्लर्क और अधिकारियों को ही प्रगणक के रूप में तैनात किया जाता था। लेकिन बदलते वक्त और देश की विशाल आबादी की सही गिनती की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने 'जनगणना नियम, 1990' के नियम 3 में संशोधन किया है। इस नए संशोधन के तहत अब सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त यानी पूरी तरह निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को भी जनगणना अधिकारी या गणनाकर्मी के रूप में नियुक्त किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।
निजी कंपनियों, बैंकों और सोसाइटियों के कर्मचारी भी आएंगे दायरे में
दो चरणों में पूरी होगी वर्ष 2027 की जनगणना प्रक्रिया
गौरतलब है कि देश में हर दस साल के अंतराल पर नियमित रूप से जनगणना कराई जाती है। हालांकि, तय शेड्यूल के मुताबिक साल 2021 में होने वाली जनगणना वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) के कारण टाल दी गई थी। अब स्वतंत्रता के बाद देश की यह आठवीं जनगणना वर्ष 2027 में आयोजित की जा रही है। यह पूरी प्रक्रिया दो स्पष्ट चरणों में संपन्न होगी। पहले चरण के दौरान देश भर में मकानों की सूची तैयार करने और घरों से जुड़ी विभिन्न जानकारियां जुटाने का काम किया जाएगा, जबकि दूसरे और अंतिम चरण में वास्तविक तौर पर प्रत्येक व्यक्ति की गिनती की जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर कर्मचारियों का दायरा बढ़ने से अब इस विशालकाय अभियान को तय समयसीमा के भीतर अधिक सटीकता के साथ पूरा किए जाने की उम्मीद है।