"मैं CJP प्रोटेस्ट में शामिल नहीं थी" नेहा बोरा ने अभिजीत दीपके को कोर्ट में दिया बड़ा झटका
लेफ्ट छात्र संगठन AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा ने खुद को कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से अलग कर लिया है। दिल्ली हाईकोर्ट में जारी सुनवाई के दौरान नेहा बोरा ने कहा कि सीजेपी ने सेंट्रल पार्क में जो विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया था, उससे उनका कोई लेना-देना नहीं था। हाईकोर्ट में दरअसल, नेहा बोरा की उस याचिका पर सुनवाई हो रही थी, जिसमें उन्होंने दिल्ली पुलिस के नोटिस को चुनौती दी है।
क्या है मामला?
दरअसल, दिल्ली पुलिस की ओर से नेहा बोरा को पीस बॉन्ड की तामील के लिये नोटिस जारी कर बुलाया गया था। हिरासत से छोड़े जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने 17 अक्टूबर को उन्हें BNSS की धारा 126 के तहत नोटिस भेजकर स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश होकर इसका कारण बताने को कहा कि क्यों न उनसे 'जांच की अवधि के दौरान शांति बनाए रखने के लिए' एक जमानतदार के साथ 10,000 रुपये का व्यक्तिगत मुचलका भरवाया जाए?
नेहा बोरा ने कोर्ट में क्या दलीलें दीं?
उन्होंने कहा, '16 अक्टूबर की शाम में जब वह विरोध का कॉल देकर मंडी हाउस एरिया जाती हैं, सिर्फ 10 से 15 मिनट में उन्हें हिरासत में ले लिया जाता है। इस समय तक वह किसी अपराध की दोषी नहीं थीं। उन्होंने सिर्फ कुछ नारे लगाए और उन्हें डिटेन कर लिया गया। हम मानते हैं कि यह डिटेंशन पूरी तरह से गैर-कानूनी है।'
सीजेपी आंदोलन से किया खुद को अलग
नेहा बोरा ने सीजेपी के प्रोटेस्ट कॉल से ही पूरी तरह से कन्नी काट ली। नेहा के वकील ने अदालत को बताया कि वह प्रोटेस्ट कॉल किसी दूसरे संगठन ने बुलाया था। बोरा की ओर से कोर्ट को बताया गया कि वह दिल्ली के कनॉट प्लेस में हुए प्रोटेस्ट में शामिल नहीं थी। उनका प्रदर्शन सीजेपी वाले प्रोटेस्ट से अलग था। वह उससे जुड़ी नहीं हैं, वह उसमें शामिल नहीं हैं। उन्होंने मंडी हाउस में प्रोटेस्ट बुलाया था। कोर्ट में यह बोलकर नेहा बोरा ने खुद को अभिजीत दीपके के तिरंगा यात्रा वाले प्रोटेस्ट से अलग कर लिया। यह दीपके के लिये बड़ा झटका माना जा रहा है। पिछले कई महीनों से नेहा बोरा और दीपके विभिन्न आंदोलनों में एक साथ दिखाई देते हुए सरकार पर हमलावर रहते थे।
तिरंगा फहराने के लिये अनुमति की ज़रूरत नहीं
नेहा बोरा ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा कि उन्हें तिरंगा फहराने के लिए किसी की अनुमति की ज़रूरत नहीं है। बोरा ने दिल्ली पुलिस के "पीस" बॉन्ड भरने के नोटिस को चुनौती दी। नेहा के वकील ने कहा कि यह बहुत छोटा मामला है, यह एक नोटिस के बारे में है जो कथित तौर पर BNSS के सेक्शन 126 और 130 के तहत जारी किया गया है। वह AISA नाम के एक संगठन की लीडर हैं।
सुनवाई के बाद आगे क्या?