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चारा घोटाला का आरोपी 25 सालों बाद लखनऊ स्टेशन से गिरफ्तार, CBI को मिली थी गुप्त सूचना

चारा घोटाला का आरोपी 25 सालों बाद गिरफ्तार
चारा घोटाला का आरोपी 25 सालों बाद गिरफ्तार

चारा घोटाला मामले में करीब 25 वर्षों से फरार चल रहे आरोपी सत्येंद्र कुमार को CBI ने गिरफ्तार कर लिया है। उसे गुरुवार देर रात उत्तर प्रदेश के लखनऊ रेलवे स्टेशन पर एक ट्रेन से पकड़ा गया। सत्येंद्र के खिलाफ अदालत से स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी था। गिरफ्तारी के बाद अब सीबीआइ उसे ट्रांजिट रिमांड पर रांची ला रही है। यहां उसे संबंधित विशेष अदालत में पेश किया जायेगा।

बताया जा रहा है कि सत्येंद्र कुमार वर्ष 2001 में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद से ही जांच एजेंसी की पकड़ से बाहर था। लंबे समय से उसकी तलाश की जा रही थी। आखिरकार गुप्त सूचना के आधार पर सीबीआइ ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

लखनऊ स्टेशन से हुआ गिरफ्तार

जानकारी के अनुसार, सीबीआइ को सूचना मिली थी कि सत्येंद्र कुमार मध्यप्रदेश के गुना से ट्रेन में सवार होकर लखनऊ पहुंचने वाला है। इस सूचना के बाद जांच एजेंसी की टीम ने लखनऊ रेलवे स्टेशन पर निगरानी शुरू कर दी। जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुंची, अधिकारियों ने संबंधित बोगी में आरोपी की पहचान की और उसे हिरासत में ले लिया।

जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया। अब उसे रांची लाकर अदालत के सामने पेश करने की तैयारी है। अदालत से स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी होने के कारण सीबीआइ लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी।

10 करोड़ रुपये से अधिक की दवा आपूर्ति में नाम

सत्येंद्र कुमार पर चारा घोटाले के दौरान पशुपालन विभाग को दवाइयों की आपूर्ति के नाम पर सरकारी खजाने से कथित तौर पर फर्जी तरीके से रकम निकालने का आरोप है। जांच के अनुसार, उसने अपने सहयोगी दिनेश राय के साथ मिलकर दवा आपूर्ति का कारोबार किया था। इस फर्म के माध्यम से 10 करोड़ रुपये से अधिक की दवाओं की आपूर्ति दिखाकर घोटाले की रकम हड़पने का आरोप लगाया गया है।

जानकारी के मुताबिक, सत्येंद्र का परिवार रांची में कचहरी के पास रहता था। सत्येंद्र कुमार और दिनेश राय ने रांची के बीआइटी मेसरा से बी-फार्मा की पढ़ाई की थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों ने मिलकर दवा निर्माण कंपनी बनाई। बाद में इसी कंपनी के माध्यम से पशुपालन विभाग को दवाओं की आपूर्ति से जुड़ा मामला सामने आया।

2001 में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद से था फरार

सीबीआइ ने वर्ष 2001 में सत्येंद्र कुमार के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद से ही वह फरार चल रहा था। बताया जाता है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने पटना स्थित अपना आवास भी छोड़ दिया था। फरारी के दौरान उसके नेपाल में रहने और वहां दवा कंपनी शुरू करने की सूचना भी जांच एजेंसी को मिली थी।

इस मामले में उसके सहयोगी दिनेश राय को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। अदालत उसे सजा भी सुना चुकी है। वहीं, सत्येंद्र की गिरफ्तारी लंबे समय से जांच एजेंसी के लिए चुनौती बनी हुई थी। अब उसकी गिरफ्तारी के बाद मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

क्या है चारा घोटाला?

चारा घोटाला एकीकृत बिहार के समय पशुपालन विभाग में हुआ बड़े वित्तीय घोटालों में से एक है। इस मामले में सरकारी खजाने से फर्जी बिलों और गलत दस्तावेजों के आधार पर रकम निकालने के आरोप सामने आये थे। वर्ष 1996 में सीबीआइ ने इसकी औपचारिक जांच शुरू की थी।

इस घोटाले से जुड़े अलग-अलग मामलों में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव सहित कई नेताओं, अधिकारियों और आपूर्तिकर्ताओं को अदालत से सजा सुनाई जा चुकी है। अब करीब 25 वर्षों से फरार सत्येंद्र कुमार की गिरफ्तारी से इस मामले में एक और अहम कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी। हालांकि, उसके खिलाफ लगे आरोपों पर आगे का फैसला अदालत की प्रक्रिया के तहत होगा।

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