बिहार वायरल

अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, दुलारचंद हत्याकांड मामले में 1 दिसंबर तक करना होगा सरेंडर

अनंत सिंह को करना होगा सरेंडर
अनंत सिंह को करना होगा सरेंडर

मोकामा विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक चर्चित मामले में उन्हें करारा झटका देते हुए उनकी जमानत बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत के इस निर्देश के बाद अब मुख्य आरोपी अनंत सिंह को आगामी 1 दिसंबर तक सरेंडर करना होगा। देश की सर्वोच्च अदालत ने यह महत्वपूर्ण फैसला आज शुक्रवार 30 अक्टूबर को सुनाया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

क्या है पूरा मामला

बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान ठीक एक साल पहले यानी 30 अक्टूबर 2025 को चुनावी झड़प के दौरान दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। आज इस बहुचर्चित कांड को पूरा एक साल बीत चुका है। इस पूरे हत्याकांड में विधायक अनंत सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। हालांकि, दिलचस्प बात यह रही कि जेल के भीतर सलाखों के पीछे रहते हुए भी अनंत सिंह ने अपनी पारंपरिक सीट मोकामा विधानसभा क्षेत्र से शानदार जीत हासिल की थी।

पटना हाईकोर्ट ने दी ज़मानत, सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द

इस मामले में कानूनी दांव-पेच के बीच पटना हाईकोर्ट ने इस साल यानी मार्च 2026 में अनंत सिंह को जमानत दे दी थी। हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ मृतक दुलारचंद के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और जमानत को चुनौती दी। शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया और अनंत सिंह को राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत के आदेश के मुताबिक, अब उन्हें हर हाल में 1 दिसंबर तक सरेंडर करना ही होगा।

पार्टी से भी बाहर किए गए अनंत सिंह व उनकी पत्नी

कानूनी झटकों के अलावा, अनंत सिंह को राजनीतिक मोर्चे पर भी तगड़ा झटका लगा है। पिछले दिनों अनंत सिंह और उनकी पत्नी सह पूर्व विधायक नीलम देवी को जेडीयू ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का दोषी पाया है। इसके चलते पार्टी ने कड़ा एक्शन लेते हुए दोनों को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है।

सरकारी आवास खाली करने का भी मिला अल्टीमेटम

पार्टी निष्कासन के बाद अनंत सिंह की पत्नी सह पूर्व विधायक नीलम देवी की मुश्किलें भी कम नहीं हुई हैं। पार्टी और प्रशासन की कार्रवाई के तहत उन्हें विभिन्न समितियों की जिम्मेदारियों से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। इसके साथ ही उन्हें एक महीने के अंदर अपना सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिया गया है। 

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