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US Midterm Elections: ट्रंप की हार का भारत पर कितना असर : टैरिफ, H-1B वीजा पर क्या बदलेगा?

डोनल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी
डोनल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी

अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है। विपक्षी डेमोक्रेट्स पार्टी ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट में बहुमत हासिल कर लिया है। इस नतीजे को ट्रंप की नीतियों के खिलाफ जनता के फैसले के तौर पर देखा जा रहा है। अब अमेरिकी संसद में डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होगा, जिससे ट्रंप के लिए अपनी नीतियों को लागू करना और नए कानून पास कराना पहले की तुलना में मुश्किल हो सकता है।

इस चुनाव का असर सिर्फ अमेरिका की राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। खासकर व्यापार, भारतीय युवाओं के लिए H-1B वीजा और रूस से तेल खरीद जैसे तीन बड़े मुद्दों पर भारत को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ट्रंप की नीतियां तुरंत बदल जाएंगी।

ट्रंप की हार से अमेरिका में क्या बदलेगा?

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच में होते हैं। इसमें संसद के दोनों सदनों के सदस्यों का चुनाव किया जाता है। इस बार डेमोक्रेट्स पार्टी ने दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी को पीछे छोड़ते हुए बहुमत हासिल किया है।

इसका मतलब है कि अब ट्रंप को अपने फैसलों और नीतियों पर संसद में विपक्ष के सवालों का सामना करना पड़ेगा। डेमोक्रेट्स सरकारी खर्च, विदेश नीति, व्यापार और इमिग्रेशन जैसे मुद्दों पर ट्रंप प्रशासन से जवाब मांग सकते हैं। वे अपनी पसंद के विधेयक पेश कर सकते हैं और ट्रंप के प्रस्तावों का विरोध भी कर सकते हैं।

हालांकि, इस हार से ट्रंप की राष्ट्रपति की कुर्सी पर कोई खतरा नहीं है। उनका कार्यकाल जनवरी 2029 तक है। वे राष्ट्रपति बने रहेंगे और उनके पास कई महत्वपूर्ण कार्यकारी अधिकार भी होंगे। लेकिन अब उन्हें संसद में पहले जैसा राजनीतिक समर्थन नहीं मिलेगा।

पहला असर: भारत पर लगे टैरिफ को लेकर मिल सकती है राहत

ट्रंप की नीतियों का भारत पर सबसे बड़ा असर व्यापार और टैरिफ के मामले में देखने को मिला है। ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामानों पर भारी आयात शुल्क लगाया था। इससे अमेरिका में भारतीय उत्पादों की कीमत बढ़ने और भारतीय निर्यातकों के सामने मुश्किलें आने की आशंका बनी।

अब अमेरिकी संसद में डेमोक्रेट्स पार्टी का बहुमत होने से ट्रंप की टैरिफ नीतियों पर सवाल उठ सकते हैं। डेमोक्रेट्स इन फैसलों की समीक्षा की मांग कर सकते हैं और भारत जैसे व्यापारिक साझेदारों पर पड़ने वाले असर को लेकर चर्चा बढ़ा सकते हैं।

इससे भारत को अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में अपनी बात रखने का बेहतर अवसर मिल सकता है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति को कई मौजूदा कानूनों के तहत टैरिफ लगाने और उनमें बदलाव करने का अधिकार मिला हुआ है। इसलिए संसद में डेमोक्रेट्स की जीत से भारतीय सामानों पर लगे टैरिफ अपने आप खत्म नहीं होंगे। 

दूसरा असर: H-1B वीजा को लेकर भारतीय युवाओं को उम्मीद

भारत पर दूसरा बड़ा असर H-1B वीजा के मामले में पड़ सकता है। अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और कुशल कर्मचारी इसी वीजा के माध्यम से काम करते हैं।

ट्रंप प्रशासन ने विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर कई सख्त कदम उठाए हैं। सितंबर 2026 में जारी एक अमेरिकी आदेश के तहत कुछ नए H-1B आवेदनों के साथ 1 लाख डॉलर का भुगतान अनिवार्य किया गया है। इस फैसले से अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करना महंगा हो सकता है।

अब संसद में डेमोक्रेट्स की मजबूती से इन प्रतिबंधों पर सवाल उठ सकते हैं। वे विदेशी कर्मचारियों के लिए नियमों में राहत देने और अमेरिकी कंपनियों की जरूरतों को ध्यान में रखने की मांग कर सकते हैं।

इसका फायदा भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और अमेरिका में नौकरी करने की तैयारी कर रहे युवाओं को मिल सकता है। हालांकि, वीजा के नियमों में तुरंत बदलाव होना तय नहीं है, क्योंकि इस मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति और संबंधित सरकारी एजेंसियों के पास भी अधिकार हैं। 

तीसरा असर: रूस से तेल खरीदने पर अमेरिकी दबाव

भारत के लिए तीसरा अहम मुद्दा रूस से कच्चे तेल की खरीद का है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर दबाव बनाया और अतिरिक्त टैरिफ तथा प्रतिबंधों की चेतावनी भी दी।

अब अमेरिकी संसद में डेमोक्रेट्स के बहुमत के बाद रूस से जुड़े अमेरिकी फैसलों पर ज्यादा चर्चा और निगरानी हो सकती है। खासकर रूस के खिलाफ प्रतिबंध, ऊर्जा व्यापार और पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे मुद्दे संसद में उठ सकते हैं।

इससे भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेने के लिए कुछ अतिरिक्त कूटनीतिक अवसर मिल सकते हैं। लेकिन यह भी संभव है कि रूस से तेल खरीदने के मामले में अमेरिकी दबाव जारी रहे। यानी डेमोक्रेट्स की जीत से भारत को तत्काल राहत मिलने की गारंटी नहीं है।

भारत-अमेरिका के रक्षा संबंधों पर कितना असर पड़ेगा?

व्यापार, वीजा और रूस से तेल खरीद के अलावा भारत और अमेरिका के रक्षा संबंध भी काफी महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरणों की खरीद, सैन्य अभ्यास, तकनीक और सुरक्षा सहयोग लगातार बढ़ा है।

इस मामले में भारत को बहुत बड़े बदलाव की आशंका फिलहाल नहीं है। इसकी वजह यह है कि भारत के साथ रक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर अमेरिका की दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में समर्थन रहा है। इसलिए अमेरिकी संसद में सत्ता बदलने के बावजूद दोनों देशों के रक्षा संबंधों में सहयोग जारी रहने की संभावना है। हालांकि, बजट और नीतिगत प्राथमिकताओं को लेकर नई संसद में चर्चा जरूर बढ़ सकती है। 

भारत के लिए क्यों अहम होंगे अगले दो साल?

कुल मिलाकर, अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की हार भारत के लिए कई नए कूटनीतिक अवसर पैदा कर सकती है। टैरिफ, H-1B वीजा और रूस से तेल खरीद जैसे मुद्दों पर भारत को अपनी बात रखने का बेहतर मौका मिल सकता है।

लेकिन यह मानना सही नहीं होगा कि डेमोक्रेट्स की जीत के बाद अमेरिका की भारत के प्रति पूरी नीति बदल जाएगी। ट्रंप जनवरी 2029 तक राष्ट्रपति बने रहेंगे और उनके पास कई महत्वपूर्ण फैसले लेने के अधिकार होंगे। 

ऐसे में आने वाले दो साल भारत और अमेरिका के रिश्तों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण होंगे। भारत को एक तरफ अमेरिका के साथ व्यापार और रणनीतिक संबंध मजबूत रखने होंगे, तो दूसरी तरफ रूस से ऊर्जा खरीद और अपने राष्ट्रीय हितों को भी ध्यान में रखना होगा।

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