झारखंड में अब अंग्रेज़ी के अलावा हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में भी आयेगा बिजली का बिल
झारखंड के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। राज्य में अब बिजली बिल समझना पहले से कहीं अधिक आसान और सुविधाजनक होने जा रहा है। झारखंड राज्य विद्युत विनियामक आयोग के नए निर्देशों के अनुसार, अब उपभोक्ताओं को अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में भी बिजली बिल जारी किए जाएंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों के आम नागरिक अपने बिजली बिल में दिए गए विवरण को बिना किसी उलझन के आसानी से पढ़ और समझ सकें।
आसान फॉर्मेट और बड़े फॉन्ट पर ज़ोर
अक्सर देखा जाता है कि अंग्रेजी में लिखे जटिल तकनीकी शब्दों और छोटे फॉन्ट के कारण आम उपभोक्ताओं को बिल समझने में काफी परेशानी होती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए वितरण कंपनियों को बिल के फॉन्ट आकार को बड़ा और स्पष्ट रखने तथा फॉर्मेट को बेहद सरल बनाने का निर्देश दिया गया है। इससे उपभोक्ताओं को यह तुरंत और स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा कि उन्होंने एक महीने में कितनी यूनिट बिजली का उपयोग किया है, उन पर कितना फिक्स्ड चार्ज लगा है और उन्हें अंतिम तारीख तक कुल कितना भुगतान करना है।
नियम में पहले ही हुआ था संशोधन
गौरतलब है कि झारखंड राज्य विद्युत विनियामक आयोग ने मार्च 2024 में बिजली आपूर्ति से जुड़े सेवा मानकों और नियमों में व्यापक बदलाव किया था। इन संशोधित नियमों में यह स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया था कि उपभोक्ताओं को सूचना का अधिकार देने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए द्विभाषी या बहुभाषी बिल प्रणाली लागू की जाए। इस नियम से विशेष रूप से उन बुजुर्गों और ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं को बड़ा लाभ मिलेगा, जिन्हें अंग्रेजी भाषा की समझ न होने के कारण दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था।
नए कनेक्शन के लिए समय-सीमा तय
सिर्फ बिल की भाषा ही नहीं, बल्कि विद्युत आयोग ने उपभोक्ताओं को मिलने वाली अन्य सेवाओं में भी पारदर्शिता और तेज़ी लाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। नए बिजली कनेक्शन जारी करने, पुराने कनेक्शनों में लोड बढ़ाने या घटाने, और नाम या श्रेणी में बदलाव जैसी सेवाओं के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय कर दी गई है। यदि बिजली विभाग तय समय के भीतर इन आवेदनों का निपटारा नहीं करता है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
पारदर्शिता बढ़ेगी और विवादों में आएगी कमी
बिजली बिलों को स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराने और सेवा की समय-सीमा तय करने से उपभोक्ताओं और बिजली विभाग के बीच का संवाद बेहतर होगा। बिल में हर एक शुल्क का ब्योरा साफ-सुथरी भाषा में होने से गलत बिलिंग की शिकायतें कम होंगी और उपभोक्ता समय पर अपने बिलों का भुगतान कर सकेंगे। राज्य सरकार और विद्युत आयोग का यह कदम राज्य में उपभोक्ता अधिकारों को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।