राजमहल लोकसभा

राजमहल लोकसभा में चलेगा तीर या खिलेगा कमल, खबर पढ़ कर तुरंत समझ जायेंगे आप.

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राजमहल लोकसभा सीट पर चुनावी मुकाबला गर्मा गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जीत हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है, जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) महागठबंधन पर भरोसा कर रही है। हालांकि, बागी विधायक लोबिन हेंब्रम परेशानी खड़ी कर रहे हैं।

राजमहल: कांग्रेस और झामुमो का गढ़

राजमहल संसदीय सीट कांग्रेस और झामुमो का गढ़ रहा है। 1957 से 2019 तक हुए 16 संसदीय चुनावों में यहां कांग्रेस ने छह बार और झामुमो ने तीन बार जीत दर्ज की है। भाजपा मात्र दो बार ही जीत पाई है। पहली बार 1998 में सोम मरांडी की जीत से भाजपा की एंट्री हुई थी, जिन्होंने झामुमो प्रत्याशी विजय हांसदा के पिता थॉमस हंसदा को नौ मतों से पराजित किया था। 2009 में भाजपा के देवीधन बेसरा ने दूसरी जीत हासिल की थी। इस लिहाज से राजमहल सीट भाजपा के लिए मुश्किल मानी जाती है।

भाजपा का दांव: ताला मरांडी

भाजपा ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ताला मरांडी को मैदान में उतारा है। उनके सामने झामुमो से निवर्तमान सांसद विजय हांसदा खड़े हैं। भाजपा बाजी पलटने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई बड़े स्टार प्रचारक मतदाताओं को अपनी ओर करने में जुटे हैं। झामुमो के बागी विधायक लोबिन हेंब्रम यहां निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में हैं, जिन्हें भाजपा संजीवनी के रूप में देख रही है। क्यूंकि ऐसा कहा जा रहा है कि जितने भी वोट लोबिन हेम्ब्रम के खाते में आएंगे। उतना वोट विजय हांसदा के हिस्से में कम होंगे।

झामुमो का भरोसा: महागठबंधन और कोर वोटर

झामुमो यह सीट ​एकबार फिर जीतने को लेकर आश्वस्त है। उसे झामुमो के कोर वोटरों सहित कांग्रेस का भी साथ मिल रहा है। अल्पसंख्यक बहुल राजमहल विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत पाकुड़ के विधायक व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम का यहां के अलावा अन्य विधानसभा क्षेत्रों में अच्छा प्रभाव है। वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उत्तराधिकारी और गुरुजी की बहू के नाम पर कल्पना सोरेन ने संथाल परगना में अपनी पहचान बना ली है।

चिंता का बिंदु: लोबिन हेंब्रम

लेकिन, झामुमो के लिए सबसे बड़ा चिंता का विषय बोरियो से झामुमो विधायक लोबिन हेंब्रम हैं। वे बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। लोबिन पिछले दो वर्षों से हेमंत सरकार के खिलाफ बगावती तेवर अपनाये हुए हैं और खुद को गुरुजी का असली चेला बताकर वोट मांग रहे हैं। लोबिन को मिलनेवाला मत झामुमो को झटका देगा।

सामाजिक-राजनीतिक समीकरण

आदिवासी, मुस्लिम और ईसाई बहुल राजमहल संसदीय क्षेत्र का सामाजिक समीकरण झामुमो के पक्ष में है। लेकिन, भाजपा पीएम नरेंद्र मोदी की गारंटी, बांग्लादेशी घुसपैठ और मुस्लिम-ईसाई मतदाताओं के विरुद्ध मतदाताओं के ध्रुवीकरण को धार देकर बाजी पलटने में लगी है। वहीं, झामुमो और कांग्रेस भाजपा का भय दिखाकर अपने वोट बैंक को एकजुट रखने में लगी है।

राजमहल लोकसभा क्षेत्र में छह विधानसभाएं हैं। जिसमें, राजमहल, पाकुड़, लिट्टीपाड़ा, बोरिओ, बरहेट और महेशपुर शामिल हैं। इन छह विधानसभा सीटों में से पांच पर इंडिया अलायन्स का कब्ज़ा है। मात्र एक सीट राजमहल से भाजपा के अनंत ओझा विधायक हैं। अगर हम बोरियो को भी किनारे कर दें जहाँ से लोबिन हेम्ब्रम विधायक हैं। तब भी चार विधानसभाओं में इंडिया अलायन्स के विधायक हैं।

राजमहल लोकसभा क्षेत्र के मतदाता

  • राजमहल लोकसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग 160,216 हैं, जो 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 10.8% हैं।
  • राजमहल लोकसभा क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति के मतदाता लगभग 436,143 हैं, जो 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 29.4% हैं।
  • राजमहल लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता लगभग 493,860 हैं, जो मतदाता सूची के विश्लेषण के अनुसार लगभग 33.3% हैं।
  • राजमहल लोकसभा क्षेत्र में ग्रामीण मतदाता लगभग 1,280,243 हैं, जो 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 86.3% हैं।
  • राजमहल लोकसभा क्षेत्र में शहरी मतदाता लगभग 203,237 हैं, जो 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 13.7% हैं।
  • 2019 के लोकसभा चुनाव के अनुसार राजमहल लोकसभा क्षेत्र के कुल मतदाता 1483480 हैं।

प्रचार वार

28 मई को राजमहल के भाजपा प्रत्याशी के लिए पीएम नरेंद्र मोदी की दुमका में चुनावी सभाएं हुई। 27 मई को साहिबगंज में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की भी चुनावी सभा थी, लेकिन खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर लैंड नहीं कर सका। बावजूद इसके अब तक आधा दर्जन केंद्रीय नेताओं और प्रदेश भाजपा के स्टार प्रचारक बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा व अन्य की यहां सभा हो चुकी है। उधर, झामुमो और कांग्रेस ने भी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन, कल्पना सोरेन के अलावा प्रदेश कांग्रेस प्रभारी गुलाम अहमद मीर, पराजेश ठाकुर समेत कई अन्य नेताओं की सभा हो चुकी है। राहुल गांधी की भी सभा होने की संभावना है।

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