1 जुलाई से लागू होंगे तीन नए क्रिमिनल लॉ, जानिए क्या क्या बदल जाएंगे…

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Ranchi : देश में अंग्रेजो के जमाने से चल रहे तीन आपराधिक कानून अब 1 जुलाई से बदल जाएंगे. दिसंबर 2023 में संसद द्वारा पारित तीन नए कानून कल पूरे देश में प्रभावी हो जाएंगे.
बता दें कि इस साल फरवरी में तीनो नए क्रिमीनल लॉ को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया था.

ये तीन नए कानून में भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम शामिल है. इन तीनों क्रिमीनल लॉ में बदलाव किये गए है.
बता दें कि नए क्रिमिनल लॉ में 33 ऐसे अपराध शामिल होंगे, जिनमें जेल की सजा बढ़ाई गई है.

23 ऐसे अपराध हैं, जिनमें अनिवार्य सजा शुरू की गई और 83 अपराधों में जुर्माना बढ़ाया गया है. आपराधिक कानून में बदलाव के साथ इसमें शामिल धाराओं का क्रम भी बदल जाएगा.

तो आईये जानते है कि कुछ अहम धाराओं में, क्या बड़े बदवाल इन नए कानूनो में हुए है.

  • पहले भारतीय दंड सहिंता (IPC) में 511 धाराएं थी लेकिन अब भारतीय न्याय संहिता में सिर्फ 358 धाराएं है.
  •  नए क्रिमनल लॉ लागू होने से हत्या करने वाले आपराधी को धारा 302 के तहत सजा सुनायी जाती थी जो अब बदल कर धारा 101 हो जाएगी.
  • पहले हत्या के प्रयास में दोषी को धारा 307 के तहत सजा मिलती थी पर अब इन्हे धारा 109 के तहत सजा होगी.
  • वहीं दुष्कर्म से जुड़े आपराध में सजा को धारा 376 में परिभाषित किया गया था, लेकिन नए कानूने में धारा 63 में बदल दिया गया है. बता दें कि 18 साल से कम उम्र की महिला का समूहिक दुष्कर्म के आरोपियो को मौत की सजा दी जाएगी, इसके अलावे 20 साल की सजा या उम्र कैद हो सकता है.
  • आईपीसी की धारा 124 देशद्रोह से जुड़े मामलो को सजा का प्रवधान इसमे रखती है लेकिन नए क्रिमनल लॉ के लागू होने से इसे धारा 52 के अंतर्गत रखा गया है.
  • पहले घातक हात्यार से लेस होकर गैरकानूनी तरीके से सभा में शामिल होना धारा 144 के अंतर्गत आता था पर अब ये धारा 189 के तहत आएगा.
  • जबकि मानहानी मामले में आईपीसी की धारा 399 का इस्तेमाल होता था जिसे अब धारा 356 में बदल दिया गया है. वहीं धोखाधडी या ठगी का आपराध धारा 420 में नहीं बल्कि 316 के तहत आएगा.

बता दें कि इस नए क्रिमनल लॉ के लागू होने से अब कोई भी व्यक्ति जीरो एफआईआर’ से किसी भी पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज करा सकता है, भले ही अपराध उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं हुआ हो.

इससे कानूनी कार्यवाही शुरू करने में होने वाली देरी खत्म होगी और मामला तुरंत दर्ज किया जा सकेगा. साथ फोन कॉल, मेसेज या फिर ईमेल के जरिये भी व्यक्ति अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है.

इसके अलावे नए कानूनों के तहत आपराधिक मामलों में फैसला मुकदमा पूरा होने के 45 दिन के भीतर आएगा और पहली सुनवाई के 60 दिन के भीतर आरोप तय किए जाएंगे. दुष्कर्म पीड़िताओं का बयान कोई महिला पुलिस अधिकारी उसके अभिभावक या रिश्तेदार की मौजूदगी में दर्ज करेगी और मेडिकल रिपोर्ट सात दिन के भीतर देनी होगी.

वहीं हम दूसरे क्रिमनल लॉ की बाद करें दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी की जगह अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता ने ले ली है. सीआरपीसी की 484 धाराओं के बदले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में 531 धाराएं हैं.

नए कानून के तहत 177 प्रावधान बदले गए हैं, जबकि नौ नई धाराएं और 39 उपधाराएं जोड़ी गई हैं. इसके अलावा 35 धाराओं में समय सीमा तय की गई है.

जबकि नए भारतीय साक्ष्य अधिनियम में 170 प्रावधान हैं. इससे पहले वाले कानून में 167 प्रावधान थे. नए कानून में 24 प्रावधान बदले हैं.

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