साहिबगंज : मौत के बाद कीचड़ में घंटों पड़ा रहा शव, तब जाकर जागा स्वास्थ्य विभाग, लगा कैंप

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देश के कई राज्यों में फिलहाल डेंगू का खतरा बढ़ा हुआ है. वहीं डेंगू, चिकन गुनिया का खतरा झारखंड के भी कई जिलों में बढ़ गया है. राज्य में डेंगू की वजह से कई मौतें अभी तक हुई हैं. लेकिन अब झारखंड में कई जगहों पर डायरिया का खतरा भी मंडरा रहा है. डायरिया का ताजा मामला साहिबगंज जिले के बरहेट प्रखंड क्षेत्र के कुसमा संथाली पंचायत के केटका टोला पहाड़िया बस्ती से है. इस इलाके में डायरिया फैला हुआ है.

डायरिया के पिछले तीन दिनों में कई मामले

साहिबंगज के केटका टोला में पिछले तीन दिनों में कई लोग डायरिया की चपेट आए हैं. डायरिया की वजह से इस इलाके के तीन लोगों की मौत भी हुई है. मरने वालों में आदिम जनजाति समुदाय की दो महिला और एक पुरुष शामिल है. इसके अलावा इस बीमारी की वजह से एक दर्जन से ज्यादा लोग बीमार हैं.

चार घंटे तक कीचड़ में पड़ा रहा शव  

डायरिया की वजह से गांव में पहले से ही मातम का माहौल है. ऐसे में एक महिला सोमी पहाड़िन (60) का शव घंटों कीचड़ पर पड़ा रहा. दरअसल, मृतक सोमी पहाड़िन का शव घर के बाहर घंटों चौखट पर कीचड़ में पड़ा रहा. इससे पहले सोमी पहाड़िन के छोटे भाई बेबो मैसा पहाड़िया (50) की भी मौत हो चुकी है. दोनों ही सदस्यों में डायरिया के लक्षण थे. बता दें कि दोनों की मौत के बाद उनका अंतिम संस्कार करने वाला कोई नहीं था, दोनों का शव घंटों घर पर ऐसे ही पड़ा रहा. उनके घर में बेबो की पत्नी दोगी पहाड़िन और उसके तीन बच्चे मंगल पहाड़िया (8 ), सुरेश पहाड़िया (6 ) और चंदा पहाड़िया (10 ) बेसुध पड़े रहे. घंटों बीत जाने के बाद आसपास के लोगों ने मदद की और दोनों का अंतिम संस्कार किया गया. इन दोनों से पहले इसी गांव में सूरजी पहाड़िन की भी मौत डायरिया की वजह से हो चुकी है.

मौत के बाद जागा स्वास्थ्य विभाग

तीन लोगों की मौत की वजह से गांव में डर का माहौल बना हुआ है. कई लोगों में डायरिया के लक्षण दिखाए दे रहे हैं. वहीं, मौत की खबर के बाद स्वास्थ्य विभाग जागा है. डायरिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए डीसी रामनिवास यादव के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टर और नर्स की टीम को गांव भेजा है. टीम कैंप लगाकर लोगों का इलाज कर रही है.

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