चतरा

चतरा संसदीय क्षेत्र में बंपर जीत के बाद भी भाजपा क्यों है चिंतित

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चतरा संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बंपर जीत हासिल की है. हालांकि, जीत के बावजूद भाजपा चिंतित है, क्योंकि उसके गढ़ माने जाने वाले मनिका विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी पिछड़ गए. वहीं, इंडिया गठबंधन भी हार के कारणों की समीक्षा में लगा हुआ है, क्योंकि इस साल के आखिर में राज्य में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं.

चतरा लोकसभा क्षेत्र में पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिनमें से चार में भाजपा आगे रही है. लेकिन मनिका विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी ने 72,045 वोट हासिल किए, जबकि भाजपा प्रत्याशी को 70,549 वोट मिले. यह चिंता का विषय है, क्योंकि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी ने इस क्षेत्र में 30 हजार से अधिक वोटों की बढ़त हासिल की थी.

भाजपा के जिला अध्यक्ष पंकज सिंह ने माना कि मनिका विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी के पिछड़ने से चिंता है. “संगठन इस पर गहन चिंतन कर रही है. आने वाले विधानसभा चुनाव तक सब कुछ ठीक कर लिया जाएगा.”

दूसरी ओर, इंडिया गठबंधन में भी चिंता है, क्योंकि उसके प्रत्याशी चार विधानसभा क्षेत्रों में हारे हैं. लातेहार और चतरा विधानसभा क्षेत्रों में इंडिया एलायंस के विधायक हैं, लेकिन इन दोनों क्षेत्रों में कांग्रेस प्रत्याशी को भारी हार का सामना करना पड़ा. सिमरिया और पांकी विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के विधायक हैं, लेकिन इस लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को इन दोनों क्षेत्रों में विधानसभा चुनाव के दौरान मिले वोटों से भी अधिक वोट मिले हैं. इससे इंडिया एलायंस के माथे पर चिंता की लकीरें आ गई हैं.

झामुमो के जिला अध्यक्ष लाल मोती नाथ शाहदेव ने कहा, “कई ऐसे कारण बने जिसके कारण इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी की हार हुई है. स्थानीयता का मुद्दा हावी रहा, जिसका असर चतरा और सिमरिया विधानसभा क्षेत्र में स्पष्ट देखा गया. वहीं गंझू समाज का वोट भी बड़ी संख्या में भाजपा प्रत्याशी को मिला. पूरे चुनाव के दौरान कहां चूक हुई, इसका मंथन किया जा रहा है, ताकि आने वाले विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन बेहतर प्रदर्शन कर सके.”

कांग्रेस के जिला अध्यक्ष मुनेश्वर उरांव ने कहा, “चतरा संसदीय क्षेत्र में इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी की हार की पूरी समीक्षा की जा रही है. चुनाव के दौरान जो भी कमी रह गई उसे सुधारा जाएगा.”

अब दोनों दलों के लिए विधानसभा चुनाव की जंग सामने है. दोनों दल अपनी-अपनी स्थिति मजबूत बता रहे हैं, लेकिन चुनाव के नतीजे से पता चलता है कि दोनों दलों के लिए आने वाले चुनाव में कड़ी मेहनत करने की जरूरत है.

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