जेपी पटेल के BJP छोड़ने और कांग्रेस में शामिल होने से चुनाव में होगा खेला, क्या हैं इतिहास ?

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Ranchi : लोकसभा चुनाव का एलान हो गया है. लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक पार्टीयां के कई नेता अपना पाला बदल रहे है. बीते कल झामुमो विधायक सीता सोरेन ने भाजपा का दामन थामा तो वही बुधवार को भाजपा विधायक जेपी भाई पटेल ने कांग्रेस का दामन थामा है. इस लेख में आपको बताएंगे जेपी पटेल के राजनीतिक सफर के बारे में…

जयप्रकाश भाई पटेल का जन्म 1982 में हुआ. उनका पैतृक घर हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ में है. जयप्रकाश भाई पटेल की स्कूली शिक्षा धनबाद के शक्ति नाथ स्कूल से प्रारंभ हुई.

जेपी पटेल का राजनीतिक सफर की शुरूआत साल 2011 में सक्रिय रूप में हुई. जेपी पटेल की पिता टेकलाल महतो के निधन के बाद शुरू हुआ. साल 2011 में ही जेपी पटेल झामुमो के टिकट पर मांडू विधानसभा के उपचुनाव के सक्रिय चुनाव में आए. और चुनाव भी जीता.

साल 2013 में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री भी झारखंड सरकार में बनाए गए. 2014 के विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने उन पर विश्वास जताया और मांडू विधानसभा से चुनाव लड़ाया और उन्हें सफलता भी मिली. वे विधायक बनकर सदन तक पहुंचे.

2019 के लोकसभा चुनाव में जयप्रकाश भाई पटेल ने अपने पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में खुलकर राजनीति करते नजर आए.

जिसके वजह से पार्टी ने इन्हें निष्कासित कर दिया. जेपी पटेल ने साल 2019 में भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा लिया था. इसके बाद भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़कर उन्होंने जीत भी हासिल की थी. बाद के दिनों में कुर्मी वोट बैंक को साधने के लिए भाजपा ने नेता प्रतिपक्ष की तलाश शुरू की थी. उस दौरान जेपी पटेल का नाम सुर्खियों में आया था. लेकिन बात नहीं बनने पर यह जिम्मेदारी अमर बाउरी को दे दी गई थी. जबकि जेपी पटेल को भाजपा ने सचेतक बना दिया था.

2019 के चुनाव से पहले भाजपा में शामिल होने पर जेपी पटेल ने कहा था कि झामुमो अब परिवार वाली पार्टी बन गयी है. उन्होंने यह भी कहा था कि हेमंत सोरेन पार्टी के विधायकों और कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं देते हैं.

हालांकि आज जेपी पटेल ने भाजपा का साथ छोड़ कर प्रदेश प्रभारी गुलाम अहमद मीर और प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर की अध्यक्षता में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली है.

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