Congress MLA पूर्णिमा नीरज सिंह इन वजहों से जा सकती हैं भाजपा में, क्या ख़त्म हो जाएगा धनबाद के सिंह मेंशन का राजनीतिक वजूद ?

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Jharkhand: झारखंड इन दिनों देश की राजनीतिक हलचल का हॉट स्पॉट बना हुआ है। पता नहीं कब कौन से नेता एक पार्टी का दामन छोड़कर दूसरी में शामिल हो जाए। मीडिया को भी भरपूर मसाला मिल रहा है, सभी की नज़र इसी तरफ घूम गयी है। हम भी अपनी निगाह धनबाद (Dhanbad) की तरफ घुमाते हैं, और थोड़ा करीब से देखने की कोशिश करते हैं। करीब जाने पर एक सवाल दिख रहा है, वही सवाल जो आपके भी मन में कहीं न कहीं है। सवाल ये कि भाजपा ने अब तक धनबाद से किसी प्रत्याशी की घोषणा क्यों नहीं की है? क्या भाजपा(BJP) को किसी का इंतजार है। अभी आया नहीं है जो, अभी आने वाला है जो……। आने वाला है या आने वाली हैं। अगर आती हैं, तो फिर धनबाद में सियासी समीकरण ऐसे बदलेंगे, जैसे अचानक कभी रांची(Ranchi) का मौसम बदल जाता है।

आइए आपको तफ्सील से बताते हैं, झारखंड में होने जा रहे बड़े सियासी बदलाव की कहानी। यह कहानी संभव है एक या दो दिन में ही कागज पर आ जाए। कहानी में किरदार हैं पूर्णिमा नीरज सिंह (Purnima Niraj Singh), उनकी गोतनी रागिनी सिंह (Ragini Singh), और पशुपति नाथ सिंह (Pashupati Nath)। भूमिका है भारतीय जनती पार्टी की और प्लॉट है

झारखंड की कोयला नगरी धनबाद।

खबर लगभग तय हो चली है कि वर्तमान में झरिया से कांग्रेस (Congress) की विधायक और रघुकुल घराने की बहु पूर्णिमा नीरज सिंह भाजपा का दामन थाम सकती हैं। यानी सीता सोरेन (Sita Soren) के बाद इंडिया गठबंधन का दूसरा विकेट पूर्णिमा नीरज सिंह के नाम से गिरेगा। इस बात से सभी वाकिफ हैं कि पूर्णिमा अपनी पार्टी कांग्रेस के नाराज थीं, अब भी नाराज हैं। यूं तो वे अकेली नाराज नहीं हैं, उनके साथ कई विधायक भी नाराज हैं। इसी नाराजगी को जताने के लिए वे दिल्ली भी गए थे, जब कांग्रेस ने अपने पुराने मंत्रियों को ही फिर से मौका दे दिया।

इसी बीच पूर्णिमा नीरज सिंह का एक बयान सामने आया था। जब गीता कोड़ा कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गई थीं, तो पूर्णिमा सिंह ने कहा था कि पार्टी को भी आत्ममंथन करना चाहिए, कोई भी फैसला अधर में लटका दिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा थे कि वे अभी तक तो कांग्रेस में हैं, लेकिन आगे का नहीं कह सकतीं। और अगर पार्टी किसी को टिकट देने से पहले अपना भविष्य सोचती है, तो विधायक भी अपने भविष्य के बारे में सोचेंगे।

ये बयान सामान्य नहीं है। इतना कहने का अर्थ ही है कि पूर्णिमा दूसरे विकल्प की तरफ सोच सकती हैं। लगभग एक महीने पुरानी बात अब सच साबित होती नजर आ रही है और संभवतः वे भाजपा के साथ जाने वाली हैं।
यदि पूर्णिमा भाजपा ज्वाइन करतीं हैं, तो इसका पहला अर्थ है कि वे भाजपा की टिकट पर धनबाद से लोकसभा (Dhanbad Loksabha) का चुनाव लड़ेंगी। इसी के साथ यह भी साफ हो जाता है कि धनबाद से पीएन सिंह का टिकट कट जाएगा। राजनीतिक विश्लेषक यह भी कहते हैं कि अगर वे भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ती हैं तो उनके जीतने की संभावना बहुत अधिक है या कहें कि जीत लगभग तय है।

राजनीतिक विश्लेषकों की बात को थोड़ा आंकडों पर लाकर हम तौलने का प्रयास करते हैं। पहली बात धनबाद लोकसभा में विधानसभा की छह सीटें हैं, जिनमें से पांच पर भाजपा के विधायक हैं और एक पर कांग्रेस की तरफ पूर्णिमा नीरज सिंह (Purnima Neeraj Singh) खुद हैं। अगर पूर्णिमा को भाजपा की तरफ गिना जाए छहों सीट पर भाजपा का प्रभाव होगा। दूसरी तरफ धनबाद सीट भाजपा की सबसे सेफ सीटों में से है। यहां 1991 से लेकर अब तक केवल एक बार कांग्रेस के सांसद रहे हैं, बाकि सात पर यहां भाजपा काबिज रही है। भाजपा की टिकट पर वर्तमान सांसद पशुपति नाथ सिंह यहां से तीन बार लगातार विजयी हुए हैं।

दूसरी तरफ यहां सिंह टाइटल के वोटर 8.2 फीसदी हैं और सबसे अधिक प्रभावी हैं। ये सभी कारक इस बात को मजबूती देते हैं कि पूर्णिमा यहां से चुनाव जीत पाने में सफल रहेंगी।
लेकिन बात यहां खत्म नहीं होती है। एक और एंगल है पूर्णिमा सिंह की गोतनी और सिंह मेंशन परिवार की बहु रागिनी सिंह का।

आप सभी इस बात से वाकिफ होंगे कि पूर्णिमा के पति नीरज सिंह की 2017 में गोली माकर हत्या करदी गई थी। इस हत्याकांड में नीरंज सिंह के चचेरे भाई और तत्कालीन विधायक संजीव सिंह मुख्य आरोपी हैं और फिलहाल जेल में बंद हैं। रागिनी सिंह उन्हीं संजीव की पत्नी हैं और वर्तमान में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की सदस्य हैं। रागिनी सिंह भी धनबाद से लोकसभा का टिकट चाह रही हैं। उनकी सास और पूर्व विधायक कुंती सिंह ने बकायदा भाजपा से इसकी मांग भी की है। लेकिन ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है।

सवाल तो यह है कि यदि पूर्णिमा सिंह भाजपा में जाती हैं, तो रागिनी सिंह क्या करेंगी? क्या वे उन्हें अपनी ही पार्टी में अपने से ऊंचे कद पर स्वीकार करेंगी और भाजपा में बनी रहेंगी। राजनीतिक समझ तो यह कहती है कि वे शायद भाजपा छोड़कर किसी और दल की तरफ रुख कर सकती हैं। वह दल कौन सा होगा, यह कहा नहीं जा सकता। जानकारी के लिए बता दें कि रघुकुल और सिंह मेंशन दोनों परिवारों का राजनिती से नाता रहा है। दोनों परिवार के सदस्य विधायक रहे हैं और दोनों परिवारों की बहुएं इस राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं।

इस पूरे आकलन को समेट कर एक बात कही जाए तो वो यह है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में पूर्णिमा नीरज सिंह की भाजपा की टिकट पर धनबाद से चुनाव लड़ने और जीतने की पूरी संभावना है।

कांग्रेस किसके इंतजार में है यह पता नहीं। क्योंकि अभी तक इंडिया गठबंधन से झारखंड की किसी भी सीट पर किसी भी प्रत्याशी का नाम स्पष्ट नहीं किया गया है। कोई उन्हें बताए कि राजनीति में देरी का खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है।

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