नक्सल प्रभावित

जिस नक्सल प्रभावित इलाके में नहीं होती थी चुनावी जनसभा, अब समय के साथ वहां के दृश्य बदल रहे हैं

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समय के साथ दृश्य बदल रहे हैं और इसके साथ ही संदर्भ भी बदल रहे हैं. जहां एक समय भय के कारण राजनीतिक सभा नहीं होती थी, आज वहीं राजनीतिक दल के नेता अपना कैंप बसाये हुए हैं. पलामू के साथ-साथ चतरा लोकसभा क्षेत्र को भी अत्यंत नक्सल प्रभावित माना जाता है. चतरा लोकसभा क्षेत्र में 20 मई को चुनाव हैं. पलामू के पांकी विधानसभा क्षेत्र चतरा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है.

पांकी विधानसभा अति नक्सल प्रभावित इलाका है. नक्सल प्रभावित इलाके को इंडिया गठबंधन के नेता टारगेट कर रहे हैं और उस इलाके में कैंप कर रहे हैं. नक्सल इलाके के वोटरों को इंडिया गठबंधन की तरफ से झारखंड मुक्ति मोर्चा के सदस्य कैंप कर रहे हैं. पलामू के अतिनक्सल प्रभावित इलाके मनातू के इलाके में इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी के पक्ष में झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेताओं ने कैंप किया है.

झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता जंगल और पहाड़ी इलाके के गांव में लोगों संपर्क साध रहे हैं और बैठक कर रहे हैं. झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिला अध्यक्ष राजेंद्र कुमार सिन्हा, दीपक तिवारी और सचिव शानू सिद्दकी ने एक समाचार संसथान को बताया कि पांच वर्षों में राज्य के हालात बदले हैं. सुदूरवर्ती इलाके में भी लोग जाना शुरू कर दिया है. वे नक्सल इलाके में कैंप कर रहे हैं और गठबंधन के प्रत्याशी के पक्ष में वोट मांग रहे हैं. उन्होंने बताया कि इलाके में पलायन, पानी और मूलभूत सुविधा एक बड़ा चुनावी मुद्दा है.

पलामू के मनातू क्षेत्र को एक अतिनक्सल प्रभावित क्षेत्र माना जाता है. मनातू की सीमा बिहार के गया और झारखंड के चतरा जिले से मिलती है. नक्सल भय के कारण, राजनीतिक दलों ने पहले इस क्षेत्र में बड़ी चुनावी सभाएं नहीं की थीं. हालांकि, अब चुनावी जनसभाएं इस क्षेत्र में आयोजित की जा रही हैं और राजनीतिक दलों का संघर्ष बढ़ गया है.

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