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JPSC-FRO परीक्षा घोटाला: CID जांच में कोचिंग संचालक संजीत कुमार की भूमिका पर बड़ा खुलासा

FRO परीक्षा घोटाला की जांच में सामने आयी कोचिंग संचालक संजीत कुमार की भूमिका
FRO परीक्षा घोटाला की जांच में सामने आयी कोचिंग संचालक संजीत कुमार की भूमिका

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में गड़बड़ी और धांधली की तफ्तीश के बीच फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (FRO) परीक्षा घोटाला को लेकर कई अहम खुलासे हुए हैं। इस परीक्षा घोटाला में एक कोचिंग संचालक की भूमिका बड़ी महत्वपूर्ण बतायी जा रही है। इस कोचिंग संचालक का नाम संजीत कुमार है, जिसे सीआईडी ने बीते 13 सितंबर को गिरफ्तार किया था। सीआईडी के मुताबिक, संजीत कुमार के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच के दौरान कई चौंकाने वाले राज़ खुले। 

FRO परीक्षा के 119 अभ्यर्थियों से कोचिंग संचालक का संपर्क

FRO परीक्षा में कुल 743 अभ्यर्थी पास हुए थे, और इन 743 में से 119 सफल अभ्यर्थी कोचिंग संचालक संजीत कुमार के संपर्क में थे। सीआईडी ने ये खुलासा न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत में किया, जहां संजीत कुमार की ज़मानत याचिका पर सुनवाई चल रही थी। इस पर संजीत कुमार की ओर से कहा गया कि चूंकि वह कोचिंग संचालक है, 3 से 4 हजार स्टूडेंट्स की कोचिंग चलाता है, इसलिए सफल अभ्यर्थियों से संपर्क होना बिल्कुल नॉर्मल है। हालांकि, अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में सफल अभ्यर्थियों से संपर्क होना नॉर्मल बात तो नहीं हो सकती। अदालत के अनुसार, ये किसी गहरी आपराधिक साज़िश का संकेत है।

रिश्तेदारों की सेटिंग कराने का भी आरोप

इस मामले में रिश्तेदारों को कथित तौर पर फायदा पहुंचाने का आरोप भी सामने आया है। सीआईडी के अनुसार, एफआरओ परीक्षा में चयनित ऋतिक रोशन और पंकज प्रसून, संजीत कुमार के चचेरे भाई हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि ऋतिक रोशन को परीक्षा में पास कराने के लिए 20 लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। आरोप है कि यह रकम अलग-अलग किस्तों में दी गई। सीआईडी ने अदालत में दोनों अभ्यर्थियों के बयानों और बैंक लेन-देन का हवाला देते हुए संजीत की भूमिका पर सवाल उठाए। जांच एजेंसी का कहना है कि इन तथ्यों से कथित सौदे में उनकी भागीदारी के संकेत मिलते हैं। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

वित्तीय लेन-देन और जेपीएससी से जुड़े लोगों के साथ संबंधों का पर्दाफाश

सीआईडी ने जांच के दौरान पैसों के लेन-देन से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण तथ्य अदालत के सामने रखा। एजेंसी के मुताबिक, जेपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन के निजी सहायक धर्मेंद्र कुमार के लिए खरीदी गई कार का डाउन पेमेंट संजीत कुमार के यूपीआई के जरिए किया गया था। इसके अलावा, संजीत के एक्सिस बैंक खाते से 6 अप्रैल को 99 हजार रुपये और 10 अप्रैल को 70 हजार रुपये धर्मेंद्र कुमार की पत्नी के बैंक खाते में भेजे गए थे। इस तरह कुल 1 लाख 69 हजार रुपये के लेन-देन की जानकारी अदालत को दी गई। दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने इन पैसों को निजी कर्ज से जुड़ा लेन-देन बताया। ऐसे में इस वित्तीय लेन-देन की भूमिका और उसका कथित परीक्षा धांधली से संबंध जांच के महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल है।

परीक्षा सिंडिकेट के नेटवर्क और पैसे वसूलने के गंभीर आरोप

जांच में परीक्षा सिंडिकेट के दूसरे लोगों के साथ संजीत के संपर्क की बात भी सामने आई है। सीआईडी के मुताबिक, उनके संपर्क ब्रज कुमार राम, धर्मेंद्र कुमार, रविशंकर कुमार और अभय कुमार तिवारी समेत कई अन्य आरोपियों से थे। सीआईडी के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क में अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर पैसे मांगने और परीक्षा में ग़लत तरीके से फायदा पहुंचाने की कोशिश की जाती थी। अदालत में पेश विवरण के अनुसार, प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के नाम पर 5 लाख रुपये और अंतिम चयन कराने के लिए 10 लाख से 25 लाख रुपये तक मांगे जाने के आरोप हैं।

FRO परीक्षा के OMR शीट में हुई छेड़छाड़

FRO परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप केवल अभ्यर्थियों के संपर्क और पैसों के लेन-देन तक सीमित नहीं हैं। शिकायत में ओएमआर शीट में छेड़छाड़ का आरोप भी लगाया गया है। सीआईडी की जांच पड़ताल में सामने आया है कि फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर परीक्षा की 350 से अधिक और सहायक वन संरक्षक (ACF) परीक्षा की 150 से अधिक ओएमआर शीट में हेरफेर किए गए। जांच के दायरे में प्रश्नपत्र लीक करने, किसी दूसरे व्यक्ति से परीक्षा दिलाने और मूल उत्तर पुस्तिकाओं में बदलाव करने जैसे आरोप भी शामिल हैं। इन आरोपों की पुष्टि के लिए जांच एजेंसी अलग-अलग सबूतों की पड़ताल कर रही है। 

TDPL ने कराया था FRO परीक्षा का संचालन 

इन आरोपों को बल दिया परीक्षा संचालन करने वाली ब्लैकलिस्टेड एजेंसी टीडीपीएल ने। टीडीपीएल को जेएसएससी ने 20 मई 2025 को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। इसके बावजूद जून 2025 में एजेंसी को बिना टेंडर के नामांकन के आधार पर जेपीएससी की परीक्षाओं के संचालन का काम दे दिया गया। सीआईडी के मुताबिक, एजेंसी के ठिकानों से ज़ब्त चार कंप्यूटरों में FRO मेंस परीक्षा की आंसर शीट्स मिले थे।

कोचिंग संचालक की ज़मानत याचिका खारिज

दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने कोचिंग संचालक संजीत कुमार की ज़मानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह सिर्फ व्यवस्था में धांधली नहीं है, बल्कि राज्य के होनहार और योग्य युवाओं के भविष्य का भी संगठित हनन है। 

अब इस पूरे मामले में सबकी नज़र सीआईडी की जांच और आगे की न्यायिक कार्रवाई पर है। सवाल सिर्फ परीक्षा में कथित धांधली का नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के भरोसे का भी है, जो अपनी मेहनत के दम पर सरकारी नौकरी हासिल करना चाहते हैं। अब देखना होगा कि जांच में आगे कौन-कौन से खुलासे होते हैं और दोषियों पर कानून का शिकंजा कब तक कसता है। 
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